इंदौर, मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण एक गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो गया है, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
संकट की शुरुआत
सूत्रों के अनुसार, पिछले सप्ताह से शहर के कई इलाकों में लोगों को दस्त, उल्टी, पेट दर्द और बुखार की शिकायतें मिलने लगी थीं। शुरुआत में इसे मौसमी बीमारी समझा गया, लेकिन जब मामले तेजी से बढ़ने लगे और कुछ मरीजों की हालत गंभीर हो गई, तो स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया। अब तक कम से कम आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 300 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।
प्रभावित क्षेत्र
दूषित पानी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में राजेंद्र नगर, विजय नगर, सुखलिया और नंदा नगर शामिल हैं। इन इलाकों में पानी की आपूर्ति एक विशेष जलाशय से की जाती है, जिसमें संदूषण की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पानी में अजीब गंध और रंग में बदलाव दिख रहा था, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
प्रशासनिक कार्रवाई
जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति तत्काल बंद कर दी है। कलेक्टर ने बताया कि पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं और प्रारंभिक रिपोर्ट में ई-कोलाई और अन्य हानिकारक बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली है। उन्होंने कहा, “यह एक गंभीर मामला है और हम इसकी पूरी जांच कर रहे हैं। दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
नगर निगम के जल आपूर्ति विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव
शहर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि अस्पताल में बिस्तरों की कमी हो गई है और आपातकालीन वार्डों में अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। गंभीर मामलों को आईसीयू में भर्ती किया गया है, जहां मरीजों को तरल पदार्थों की कमी पूरी करने के लिए ड्रिप लगाई जा रही है।
निवासियों में आक्रोश
स्थानीय निवासी प्रशासन की लापरवाही से नाराज हैं। राजेंद्र नगर की एक निवासी शिल्पा वर्मा ने बताया, “हमने कई बार पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी, लेकिन किसी ने सुनी नहीं। अब लोगों की जान जा रही है और तब प्रशासन की नींद खुली है।”
विपक्षी दलों ने भी सरकार पर जनता की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया है और मुआवजे की मांग की है।
आपातकालीन उपाय
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू की है। जगह-जगह पर जल शुद्धीकरण की गोलियां वितरित की जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविर लगाए हैं और लोगों से अपील की है कि वे केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। गंभीर रूप से बीमार लोगों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।
जांच जारी
जल आपूर्ति प्रणाली में कैसे संदूषण हुआ, इसकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सीवर लाइन के पानी के पाइपलाइन में रिसाव की आशंका जताई जा रही है। तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम पूरी जल आपूर्ति व्यवस्था की जांच कर रही है।
यह घटना जल सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में मौजूद खामियों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण और बुनियादी ढांचे के रखरखाव में लापरवाही ऐसी त्रासदियों को जन्म देती है।
