गुवाहाटी, असम – पूर्वोत्तर भारत के विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई है। लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन हुआ, जो इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
असम की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
नया टर्मिनल भवन असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वास्तुकला का एक अद्भुत संगम है। टर्मिनल की डिजाइन में पारंपरिक असमिया वास्तुकला के तत्वों को शामिल किया गया है, जिसमें स्थानीय हस्तशिल्प, बांस की कारीगरी और क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाने वाले तत्व प्रमुखता से मौजूद हैं।
टर्मिनल की छत का डिजाइन पारंपरिक असमिया ‘जापी’ (शंक्वाकार टोपी) से प्रेरित है, जो राज्य की पहचान का प्रतीक है। भवन की दीवारों पर स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई गई भित्तिचित्र और मूर्तियां असम के इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की कहानी बयान करती हैं।
अत्याधुनिक सुविधाएं और विस्तारित क्षमता
नया टर्मिनल लगभग 95,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें प्रति वर्ष लगभग 1 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता है। यह पुराने टर्मिनल की तुलना में तीन गुना अधिक क्षमता प्रदान करता है, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को पूरा करेगा।
टर्मिनल में 64 चेक-इन काउंटर, 16 सुरक्षा जांच क्षेत्र, 16 एरोब्रिज और आधुनिक बैगेज हैंडलिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए विशाल प्रतीक्षालय, आधुनिक शौचालय, नर्सिंग रूम, और विशेष आवश्यकता वाले यात्रियों के लिए समर्पित सुविधाएं उपलब्ध हैं।
स्वदेशी तकनीक और हरित पहल
नया टर्मिनल स्वदेशी तकनीक और पर्यावरण अनुकूल समाधानों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। भवन में सौर ऊर्जा पैनल स्थापित किए गए हैं जो टर्मिनल की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं। वर्षा जल संचयन प्रणाली, एलईडी लाइटिंग और ऊर्जा कुशल एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं।
टर्मिनल को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है, जिसमें प्राकृतिक प्रकाश के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया है। भवन के चारों ओर हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं जिनमें स्थानीय पौधों की प्रजातियां लगाई गई हैं।
डिजिटल और स्मार्ट सुविधाएं
नया टर्मिनल डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करता है। यात्री डिजी यात्रा सुविधा का उपयोग करके फेशियल रिकग्निशन के माध्यम से सहज यात्रा का अनुभव कर सकते हैं। पूरे टर्मिनल में मुफ्त हाई-स्पीड वाई-फाई, डिजिटल साइनेज और इंटरैक्टिव किओस्क उपलब्ध हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए मोबाइल ऐप आधारित सेवाएं, ऑनलाइन चेक-इन और बैगेज ट्रैकिंग की सुविधा भी प्रदान की गई है। टर्मिनल में अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली स्थापित की गई है जिसमें सीसीटीवी कैमरे और स्वचालित खतरा पहचान प्रणाली शामिल है।
पूर्वोत्तर के लिए आर्थिक अवसर
नया टर्मिनल केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
गुवाहाटी एयरपोर्ट पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के लिए एक प्रमुख गेटवे है। नई सुविधाओं से देश के अन्य हिस्सों और अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी। इससे क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में वृद्धि होगी।
स्थानीय रोजगार और कौशल विकास
परियोजना के निर्माण के दौरान हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिला। टर्मिनल के संचालन से भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। हवाई अड्डा प्राधिकरण स्थानीय युवाओं के लिए विमानन क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रम भी चला रहा है।
स्थानीय व्यंजन और शॉपिंग
नए टर्मिनल में असमिया व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। फूड कोर्ट में पारंपरिक असमिया भोजन परोसने वाले रेस्तरां और कैफे हैं जहां यात्री मसोर टेंगा, खार, पिठा और असम चाय का स्वाद ले सकते हैं।
शॉपिंग क्षेत्र में स्थानीय हस्तशिल्प, असम सिल्क, चाय और अन्य उत्पादों की दुकानें हैं जो स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर प्रदान करती हैं।
भविष्य की योजनाएं
नए टर्मिनल के साथ, गुवाहाटी एयरपोर्ट के विस्तार की और भी योजनाएं हैं। दूसरे रनवे का निर्माण, कार्गो सुविधाओं का विस्तार और अधिक अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को जोड़ने की योजना है। हवाई अड्डे को दक्षिण पूर्व एशिया के लिए एक प्रमुख हब बनाने का लक्ष्य है।
निष्कर्ष
गुवाहाटी एयरपोर्ट का नया टर्मिनल पूर्वोत्तर भारत के विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह न केवल बेहतर यात्रा सुविधा प्रदान करता है बल्कि असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का गौरवपूर्ण प्रदर्शन भी करता है। आधुनिक तकनीक, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और स्थानीय परंपराओं के संगम से निर्मित यह टर्मिनल भारत के विमानन क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करता है।
यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि विकास और संस्कृति साथ-साथ चल सकते हैं, और बुनियादी ढांचे का विकास क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करते हुए आर्थिक प्रगति का माध्यम बन सकता है।

