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शांति विधेयक पर अमेरिका की टिप्पणी: निजी भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित शांति (SHANTI) विधेयक पर अमेरिका ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह विधेयक दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं

शांति विधेयक का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा देना और व्यापार में पारदर्शिता लाना है। इस विधेयक के तहत बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी को सुगम बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।

अमेरिकी प्रतिक्रिया

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “हम भारत के इस कदम का स्वागत करते हैं। शांति विधेयक न केवल भारत में व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाएगा, बल्कि अमेरिकी कंपनियों के लिए भी भारतीय बाजार में निवेश के नए अवसर खोलेगा।”

वाशिंगटन में तैनात भारतीय राजदूत ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां पहले से ही भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं और यह विधेयक उन्हें और अधिक प्रोत्साहन देगा।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

भारतीय उद्योग जगत ने भी इस विधेयक का स्वागत किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष ने कहा कि यह विधेयक देश में व्यापार करने को आसान बनाएगा और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को आकर्षित करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, “यह एक दूरदर्शी कदम है जो भारत को वैश्विक निवेश के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बनाएगा।”

कई प्रमुख भारतीय और अमेरिकी कंपनियों ने इस विधेयक को सकारात्मक बताया है। तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों ने विशेष रूप से इसकी सराहना की है, क्योंकि इससे उन्हें अनुसंधान और विकास में निवेश करने में आसानी होगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

हालांकि, विपक्षी दलों ने कुछ चिंताएं भी व्यक्त की हैं। उनका कहना है कि निजीकरण के इस कदम से सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों पर प्रभाव पड़ सकता है और रोजगार की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। कुछ सांसदों ने मांग की है कि विधेयक में श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रावधान शामिल किए जाएं।

सत्ताधारी पक्ष ने इन आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि विधेयक में सभी हितधारकों के हितों का ध्यान रखा गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि निजी भागीदारी से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे न कि घटेंगे।

आर्थिक प्रभाव

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह विधेयक सही तरीके से लागू किया गया, तो अगले पांच वर्षों में भारत में विदेशी निवेश में 20-25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इससे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी इस विधेयक को सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि यह भारत को अपने आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।

आगे की राह

शांति विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है। सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से इस पर रचनात्मक बहस का आग्रह किया है। विशेषज्ञों की एक समिति पहले ही इस विधेयक की समीक्षा कर चुकी है और अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप दी हैं।

अमेरिका के साथ-साथ यूरोपीय संघ और जापान जैसे अन्य देशों ने भी इस विधेयक में रुचि दिखाई है। यह भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।

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