ढाका/नई दिल्ली, 13 फरवरी 2026। बांग्लादेश में राजनीति का पूरा नक्शा बदल गया है। 12-13 फरवरी 2026 को हुए ऐतिहासिक संसदीय चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने 300 सदस्यीय संसद में दो-तिहाई से भी ज़्यादा बहुमत हासिल किया और BNP के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 209 सीटें जीतीं। यह जीत इतनी बड़ी है कि इसे बांग्लादेश की राजनीति में पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी उलटफेर माना जा रहा है।
तारिक रहमान — निर्वासन से सीधे सत्ता की कुर्सी तक
60 वर्षीय तारिक रहमान एक राजनीतिक राजवंश से आते हैं। उनके पिता जनरल जिया-उर-रहमान ने 1978 में BNP की स्थापना की थी, और उनकी माँ खालिदा ज़िया तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं, जिनका दिसंबर 2025 में निधन हो गया।
तारिक रहमान 25 दिसंबर 2025 को 17 साल के लंदन निर्वासन के बाद स्वदेश लौटे थे, और अब वे देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की दिशा में हैं। उन्होंने एक से अधिक सीटों पर चुनाव जीता।
स्वदेश लौटने पर तारिक रहमान एक बदले हुए नेता के रूप में नज़र आए — उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर की तर्ज पर कहा, “मेरे पास अपने लोगों और अपने देश के लिए एक योजना है।” उन्होंने गरीब परिवारों के लिए आर्थिक मदद, प्रधानमंत्री पद पर 10 साल की सीमा, और विदेशी निवेश बढ़ाने जैसे वादे किए।
शेख हसीना के पतन से शुरू हुई थी यह कहानी
यह पूरी कहानी जुलाई-अगस्त 2024 में शुरू हुई। उस जन-आंदोलन में संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 1,400 तक लोगों की मौत हुई, और लंबे समय तक सत्ता में रहीं Awami League की प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर भागने पर मजबूर हो गईं। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने देश संभाला और अब यह चुनाव उस ऐतिहासिक संक्रमण की परिणति है।
यह चुनाव बांग्लादेश का पहला वोट था जो 2024 के Gen Z-नेतृत्व वाले जन-उभार के बाद हुआ। इस स्पष्ट जनादेश को 175 मिलियन की आबादी वाले इस मुस्लिम-बहुल देश में स्थिरता के लिए ज़रूरी माना जा रहा था।
चुनाव के साथ-साथ एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी हुआ। मुहम्मद यूनुस के 84-सूत्रीय “जुलाई राष्ट्रीय चार्टर” को भी मतदाताओं ने भारी बहुमत से मंज़ूरी दी, जिसमें केयरटेकर सरकार की व्यवस्था, द्विसदनीय संसद, और महिलाओं के लिए बेहतर प्रतिनिधित्व जैसे प्रावधान शामिल हैं।
PM मोदी का फोन — बधाई भी, संदेश भी
BNP की जीत के कुछ घंटों के भीतर ही भारत से एक अहम कदम उठाया गया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर उनकी जीत पर बधाई दी। मोदी ने अपने X हैंडल पर लिखा, “तारिक रहमान से बात करके खुशी हुई। मैंने बांग्लादेश चुनाव में उनकी उल्लेखनीय जीत पर बधाई दी।” उन्होंने यह भी कहा कि “दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए भारत, बांग्लादेश के लोगों की शांति, प्रगति और समृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।”
यह कूटनीतिक कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत-बांग्लादेश संबंध फिलहाल एक नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं।
भारत के लिए क्यों है यह चिंता का विषय?
BNP की यह जीत भारत के लिए कई सवाल खड़े करती है।
शेख हसीना की मौजूदगी का मसला: शेख हसीना भागकर भारत में हैं और नई दिल्ली ने अब तक बांग्लादेश के प्रत्यर्पण के अनुरोध का जवाब नहीं दिया, जबकि नवंबर 2025 में एक बांग्लादेशी अदालत ने हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराधों में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी। यह मुद्दा नई सरकार के साथ भारत के संबंधों पर लगातार दबाव बना रहेगा।
बांग्लादेश में भारत-विरोधी माहौल: अमेरिकी राजनयिक और स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक जॉन डेनीलोविज़ के अनुसार, “पिछले 18 महीनों में बांग्लादेश की जनता भारत के खिलाफ हो गई है। तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कितनी दूर तक ले जा सकते हैं — बिना अपनी जनता के गुस्से का सामना किए।”
चीन का बढ़ता प्रभाव: BNP ने पहले ही कह दिया है कि वह चीन के साथ संबंध और गहरे करेगी — जो बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से चिंताजनक संकेत है।
चुनाव के आंकड़े — एक नज़र में
Election Commission के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार BNP ने 209 सीटें जीतीं। Jamaat-e-Islami — जो पहले शेख हसीना की सरकार में प्रतिबंधित था — ने 68 सीटें हासिल कीं और वह मुख्य विपक्ष बनेगा। छात्र-आंदोलन से उभरी National Citizen Party (NCP) केवल 6 सीटें ही जीत पाई। कुल मतदान लगभग 59.44 प्रतिशत रहा।
आगे की राह — चुनौतियाँ कम नहीं
हालांकि BNP को दो-तिहाई बहुमत मिला है, फिर भी सामने कई चुनौतियाँ हैं — देश में कानून-व्यवस्था बहाल करना और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना सबसे बड़ी प्राथमिकताएं होंगी। तारिक रहमान ने न केवल 17 साल के निर्वासन के बाद वापसी की है, बल्कि उन पर भ्रष्टाचार और मनी-लॉन्ड्रिंग के जो मुकदमे Awami League के शासन में चले थे, वे यूनुस की अंतरिम सरकार ने खारिज कर दिए।
बांग्लादेश के इस नए राजनीतिक अध्याय पर सिर्फ ढाका ही नहीं, बल्कि नई दिल्ली, बीजिंग और वाशिंगटन — सभी की नज़रें टिकी हुई हैं। क्या तारिक रहमान अपने पड़ोसियों के साथ संतुलन साध पाएंगे, यही सवाल आने वाले महीनों में दक्षिण एशिया की राजनीति का केंद्र बनेगा।