नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज और कल राजधानी दिल्ली में मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। यह सम्मेलन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव भाग लेंगे। सम्मेलन के दौरान विकास के विभिन्न पहलुओं, शासन में सुधार, नीतियों के क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बुनियादी ढांचे का विकास, रोजगार सृजन और डिजिटल भारत की पहल शामिल हैं। प्रधानमंत्री राज्यों के मुख्य सचिवों से सीधे संवाद करेंगे और उनसे अपने-अपने राज्यों में विकास कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी लेंगे।
यह सम्मेलन सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि राज्यों के साथ नियमित संवाद और समन्वय से ही देश के समग्र विकास को गति दी जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सम्मेलन प्रशासनिक अधिकारियों को एक मंच प्रदान करते हैं जहां वे अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए एक-दूसरे से सीख सकते हैं। पिछले चार सम्मेलनों में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे, जिनका राज्यों में सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हुआ है।
सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री संबोधन देंगे और राज्यों को आगामी वित्तीय वर्ष के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे। यह सम्मेलन नए भारत के निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम होगा।